स्कूल बस का दुरुपयोग और परिवहन आदेशों की अवहेलना से हुआ बड़ा हादसा…

बलरामपुर – छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा पर बलरामपुर जिले के समीप हुए भीषण बस हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और परिवहन नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड के ओरसा पाठ क्षेत्र में हुए इस हादसे में बलरामपुर के कई लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में यात्री घायल बताए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार बस बलरामपुर से झारखंड “लोटा पानी” कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि यह बस ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल बलरामपुर की बताई जा रही है, जिसे नियमों के विपरीत निजी कार्यक्रम में सवारियों को ढोने के लिए इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक तोर पर पता चल रहा है कि बस में क्षमता से कहीं अधिक, करीब 100 यात्री सवार थे, जो सीधे तौर पर हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है।
लापरवाही यहीं नहीं रुकी। आज ही बलरामपुर परिवहन विभाग द्वारा सभी स्कूल बस संचालकों को वाहनों की जांच के लिए तलब किया गया था, लेकिन संबंधित बस जांच में शामिल न होकर सरकारी आदेशों को खुला अंगूठा दिखाते हुए यात्रियों को लेकर झारखंड रवाना हो गई। यह सीधे तौर पर परिवहन विभाग के आदेशों की अवहेलना और गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।

हादसा अमटाही बैरियर के पास हुआ बताय जा रहा है, जो झारखंड के महुआटांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है और बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र से लगा हुआ है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

ताजा अपडेट के अनुसार इस दुर्घटना में 87 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। इनमें से 27 घायलों का इलाज कार्मेल अस्पताल में और 60 घायलों का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है। वहीं पांच लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।
इस दर्दनाक हादसे पर छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री वरिष्ठ नेता रामविचार नेताम ने ट्वीट कर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है और प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि गंभीर रूप से घायलों को त्वरित और समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाए। साथ ही बचाव एवं राहत कार्य पूरी तत्परता से किए जा रहे हैं।
फिलहाल यह मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि परिवहन नियमों की अनदेखी, क्षमता से अधिक सवारी, स्कूल बसों के दुरुपयोग और सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना का उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सवाल यह है कि जिम्मेदारों पर कब और क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह हादसा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



