
बलरामपुर। नगर पंचायत वाड्रफनगर में आवारा कुत्तों के झुंड ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सड़क पर चलने से लेकर अपने घर के आसपास तक सतर्क रहना पड़ रहा है। तस्वीरों में लोग डंडा लेकर कुत्तों को खदेड़ते नजर आ रहे हैं। नजारा देखकर ऐसा लगता है, मानो लोग बकरियां पालकर उन्हें बाड़े में पहुंचाने निकले हों, लेकिन यहां लोग अपने जानवरों को नहीं, बल्कि आवारा कुत्तों को हांकने में लगे हैं।
मुसीबत सिर्फ राहगीरों की नहीं, पशुपालकों की भी है। बकरियों को जरा-सी ढील मिलते ही कुत्तों के झुंड उन पर हमला कर देते हैं। जिन बकरियों से गरीब परिवारों की आजीविका चलती है, उनकी सुरक्षा भी अब चिंता का विषय बन गई है। पशुओं पर हमले और उपचार के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचने वाले मामलों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

अब इस समस्या के साथ एक और चिंता जुड़ रही है। इन दिनों कुत्तों में प्रजनन की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। गर्भधारण के बाद कुतिया का गर्भकाल सामान्यतः करीब 58 से 63 दिन होता है। ऐसे में आने वाले समय में पिल्लों की संख्या बढ़ सकती है और आवारा कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण की चुनौती और बड़ी हो सकती है।
पिल्लों की सुरक्षा को लेकर कुछ कुत्ते आक्रामक व्यवहार भी दिखा सकते हैं। हालांकि, हर कुत्ता हमला करेगा, ऐसा नहीं है। लेकिन यदि नगर में कुत्तों की संख्या बढ़ती है और उनके व्यवहार पर निगरानी व उचित प्रबंधन नहीं होता, तो राहगीरों, बच्चों और पशुपालकों की परेशानी बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब सवाल यह है कि नगर पंचायत कब जागेगी? क्या जिम्मेदारों को किसी बड़ी घटना का इंतजार है? क्या लोगों को अपने ही मोहल्ले में सुरक्षित रहने के लिए डंडा लेकर चलना पड़ेगा? और पशुपालक अपनी बकरियों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए कब तक पहरेदारी करते रहेंगे?
विडंबना देखिए, एक तरफ लोग कुत्तों को खदेड़ने में लगे हैं, दूसरी तरफ पशुपालक अपने जानवरों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं और आने वाले दिनों में कुत्तों की संख्या बढ़ने की आशंका भी है।
नगर पंचायत को अब आवारा कुत्तों की समस्या पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। नसबंदी, टीकाकरण, कुत्तों की संख्या का आकलन और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जैसे उपायों को प्राथमिकता देनी होगी।
वरना आने वाले समय में वाड्रफनगर की तस्वीर कुछ ऐसी हो सकती है कि लोग अपने काम से कम और आवारा कुत्तों से बचने के इंतजाम में ज्यादा व्यस्त नजर आएं।




