बलरामपुरवाड्रफनगर

बैठक में मौजूद, तिरंगा यात्रा से नदारद! क्या तिरंगे के सम्मान से बड़ी हो गई राजनीति?

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा रायपुर से हर घर तिरंगा यात्रा की शुरुआत की गई, जिसके बाद प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भी तिरंगा यात्रा निकालने के निर्देश दिए गए। इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर नगर पंचायत में भी तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया।

तिरंगा यात्रा से पहले नगर पंचायत कार्यालय में परिषद की बैठक बुलाई गई। बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष, वार्ड पार्षद, एल्डरमैन और नगर पंचायत के कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान नगर पंचायत के CMO ने सभी जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों को बैठक समाप्त होने के बाद तिरंगा यात्रा निकाले जाने की जानकारी दी।

बैठक खत्म हुई और तिरंगा यात्रा भी निकली, लेकिन यात्रा की तस्वीरों ने जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। नगर पंचायत में कुल 15 पार्षद हैं, लेकिन तिरंगा यात्रा में महज 6 पार्षद, एल्डरमैन, अध्यक्ष और कुछ कर्मचारी ही शामिल हुए।

अब सवाल यह है कि जब देश की आन-बान-शान तिरंगे के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम की जानकारी बैठक में पहले ही दे दी गई थी, तो आखिर बाकी जनप्रतिनिधि तिरंगा यात्रा से क्यों दूर रहे?

क्या देशभक्ति के इस आयोजन में शामिल होने के लिए भी जनप्रतिनिधियों को अलग से न्योता चाहिए? क्या नगर पंचायत की परिषद बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों के लिए तिरंगा यात्रा में शामिल होना जरूरी नहीं समझा गया? या फिर स्थानीय राजनीति की खींचतान राष्ट्रीय पर्व और तिरंगे के सम्मान से भी बड़ी हो गई?

तिरंगा किसी पार्टी, नेता या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश की आन-बान-शान का प्रतीक है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की कम मौजूदगी निश्चित तौर पर सवाल खड़े करती है। जनता ने जिन्हें अपना प्रतिनिधि चुनकर नगर पंचायत भेजा है, उनसे उम्मीद रहती है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय आयोजनों में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

वाड्रफनगर की यह तस्वीर अब चर्चा का विषय बनी हुई है और सवाल यही है—जब तिरंगे के सम्मान की बात आई, तो 15 में से अधिकांश पार्षद आखिर क्यू नही शामिल हुए ?

Related Articles

error: Content is protected !!