अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर 250 बुजुर्गों का सम्मान, कलेक्टर ने शॉल-श्रीफल भेंट कर लिया आशीर्वाद

उम्र के आखिरी पड़ाव में चाहिए बस दो वक्त का भोजन और मीठे बोल, बलरामपुर में 250 वृद्धजनों का सम्मान
बलरामपुर, 01 अक्टूबर 2026।
समय के पहिए के साथ जीवन निरंतर आगे बढ़ता रहता है। बचपन, जवानी और बुढ़ापा—उम्र के इन तीन पड़ावों में इंसान न जाने कितने सुख-दुख, संघर्ष और अनुभव अपने भीतर समेट लेता है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचकर उसे अपने किए कर्मों के बदले किसी बड़े सम्मान की चाह नहीं होती। वह चाहता है तो बस अपनों का प्यार, सेवा के बदले सेवा, त्याग के बदले अपनापन और दो वक्त का भोजन के साथ मीठे बोल।

ममत्व की भावना उम्र के इस पड़ाव पर भी खत्म नहीं होती। अपने बच्चों की तकलीफ देखकर बुजुर्ग आज भी अपनी जरूरतों को पीछे कर देते हैं। शायद यही वजह है कि बुजुर्गों का सम्मान केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि उनके जीवनभर के त्याग और अनुभव के प्रति समाज का आभार है।
इसी भाव के साथ अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर बलरामपुर के जनपद पंचायत कार्यालय सभाकक्ष में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेभर से पहुंचे करीब 250 वृद्धजनों को श्रीफल और शॉल भेंट कर सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। सम्मान पाकर बुजुर्गों के चेहरों पर आई मुस्कान पूरे आयोजन की सबसे भावुक तस्वीर बनी।

कलेक्टर ने वृद्धजनों को समाज और परिवार की जड़ बताते हुए कहा कि उनके त्याग, अनुभव और आशीर्वाद से आने वाली पीढ़ियां आगे बढ़ती हैं। बुजुर्गों का सम्मान, उनका मान बढ़ाना और उनकी सेवा करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के आशीर्वाद से जिला विकास की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जिले में वृद्धजनों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसी कड़ी में जिले में वृद्धजन केंद्रित विशेष क्लिनिक शुरू किया जाएगा, जहां पंजीयन से लेकर उपचार तक स्वास्थ्य सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी, ताकि बुजुर्गों को इलाज के लिए भटकना न पड़े।
बचपन फिर लौटा, खेलों में दिखा बुजुर्गों का उत्साह

कार्यक्रम में बुजुर्गों के लिए विभिन्न खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं। रिंग टॉस, बॉल फेंक, बैलून गेम और रिंग कैच में बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। खेल के दौरान उनके चेहरों पर दिखाई दी खुशी और ठहाकों ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। ऐसा लगा जैसे उम्र की सीमाएं कुछ देर के लिए थम गई हों और बुजुर्ग फिर अपने बचपन में लौट आए हों।
इस अवसर पर वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बलरामपुर, जनपद अध्यक्ष, जनपद उपाध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
वृद्धावस्था जीवन का अंत नहीं, अनुभवों का वह पड़ाव है जहां इंसान को सबसे ज्यादा जरूरत सम्मान, अपनापन और मीठे बोल की होती है।




